महंगाई के खिलाफ लुधियाना में मजदूरों का जोरदार प्रदर्शन

महंगाई के खिलाफ लुधियाना में मजदूरों का जोरदार प्रदर्शन

CITU के आह्वान पर हीरो साइकिल एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के मजदूरों ने फूंका केंद्र सरकार का पुतला

लुधियाना, 27 अगस्त:
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) के आह्वान पर लुधियाना में हीरो साइकिल तथा आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के मजदूरों ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए केंद्र की भाजपा-आरएसएस सरकार का पुतला फूंका।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली 14 आवश्यक खाद्य एवं घरेलू वस्तुओं को जीएसटी के दायरे से बाहर किया जाए, महंगाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और गरीब तथा मजदूर परिवारों को सस्ती दरों पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करवाई जाएं। CITU ने भी 27 अगस्त को महंगाई विरोधी दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया था।

इस अवसर पर रामवृक्ष यादव, समर बहादुर, सोनू गुप्ता और रमेश सहित मजदूर नेताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने मजदूर और आम परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। मजदूर की मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा केवल राशन और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में खर्च हो रहा है। ऐसे में सरकार को जनता को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

वक्ताओं ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का दावा करने वाली सरकार को यह बताना चाहिए कि महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ते निजीकरण से आम जनता को राहत कब मिलेगी? सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक संपत्तियों का लगातार निजीकरण जनता के हित में नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, परिवहन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को मुनाफे का साधन बनाने के बजाय जनता के अधिकार के रूप में मजबूत किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश उद्योगपतियों और पूंजीपतियों से ही नहीं, बल्कि मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों और मेहनतकश जनता के खून-पसीने से बनता है। मजदूर अपने श्रम से कारखानों को चलाता है, उत्पादन करता है और देश की अर्थव्यवस्था को गति देता है। लेकिन आज वही मजदूर महंगाई, अस्थायी रोजगार, कम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा की कमी के कारण बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर है।

मजदूर नेताओं ने मांग की कि—

- रोजमर्रा की 14 आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी समाप्त किया जाए और उन्हें सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाए।
- महंगाई पर तत्काल प्रभावी रोक लगाई जाए।
- मजदूरों के लिए सम्मानजनक न्यूनतम मजदूरी और समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया जाए।
- ठेका प्रथा और रोजगार की असुरक्षा पर रोक लगाकर स्थायी रोजगार को बढ़ावा दिया जाए।
- सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों का निजीकरण बंद किया जाए।
- राशन व्यवस्था को मजबूत कर गरीब और मजदूर परिवारों को सस्ता राशन उपलब्ध कराया जाए।
- बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा किए जाएं।
- श्रम कानूनों में मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाले प्रावधानों को वापस लिया जाए।
- मजदूरों के लिए पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित की जाए।

वक्ताओं ने कहा कि जब सरकार महंगाई और बेरोजगारी पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है तथा जनता की समस्याओं का समाधान करने में विफल है, तो प्रधानमंत्री और संबंधित केंद्रीय मंत्रियों को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार का काम जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना है, न कि सवाल उठाने वालों की आवाज दबाना।

अंत में मजदूर नेताओं ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और मजदूरों के अधिकारों के सवाल पर संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। मजदूर एकता ही मजदूरों की सबसे बड़ी ताकत है और मेहनतकश जनता की एकजुट आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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