अखंड कीर्तन में शामिल हुए भाजपा जिला महामंत्री
बलरामपुर/राजपुर। बलरामपुर जिले के राजपुर सहित आसपास के शिव मंदिरों में महाशिवरात्रि पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। ओकरा कोठी पत्थल में भोलेनाथ को जल चढ़ाने आधा किमी तक श्रद्धालुओं की लाइन लगी रही। महाशिवरात्रि पर करीब 20 हजार लोगों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। भीड़ को देखते हुए पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्व दीपक त्रिपाठी के निर्देश पर थाना प्रभारी भारद्वाज सिंह ने पुलिस की ड्यूटी लगाई थी।

राजपुर से तीन किलोमीटर दूर ग्राम ओकरा कोठी पत्थल एक विशाल पीपल पेड़ के नीचे शिव मंदिर है। यहां जमीन से एक-एक कर दर्जनों शिवलिंग निकले हैं। महाशिवरात्रि पर अखंड रामायण पाठ, भजन-कीतर्न के साथ पंडित पंकज मिश्रा द्वारा मंत्रोचार के साथ पूजापाठ संपन्न कराया गया। महाशिवरात्रि महोत्सव पर 14 फ़रवरी को कलश यात्रा, अखंड कीर्तन, 15 फ़रवरी को रूद्राभिषेक, सम्पूर्ण रामचरितमानस पाठ, अखंड भंडारा, हवन पूर्णाहुति के बाद समापन हुआ। समिति के संरक्षक महेंद्र अग्रवाल, अध्यक्ष कपिल देव कौशिक, कोषाध्यक्ष दसरू दास, मुख्य जजमान मनोज बंसल, सुरेंद्र सांडिल्य, राधेश्याम अग्रवाल, रामप्रसाद, शिवलाल मरावी, हरिचंद, मुकेश गुप्ता, उमेश गुप्ता, विजय गुप्ता, राहुल, भोला, दुर्योधन मरावी, लक्ष्मण टेकाम, अर्जुन, संजय गोयल आदि सक्रिय थे।

अखंड कीर्तन में शामिल हुए भाजपा जिला महामंत्री
महाशिवरात्रि के अवसर पर ओकरा कोठी पत्थल में बलरामपुर जिले के राजपुर निवासी संजय सिंह अखंड कीर्तन में शामिल होकर भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिरों में लगा श्रद्धालुओं का तांता
राजपुर मां महामाया मंदिर प्रांगण में शिव मंदिर, सेवारी शिव मंदिर में राजेश्वर गुप्ता ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। सरनापारा पावर हाउस शिव मंदिर, गेउर नदी शिव मंदिर, हरीतिमा शिव मंदिर में डिप्टी रेंजर सुशील ठाकुर ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई, परसा शिव मंदिर, शिवपुर शिव मंदिर, परसापानी शिव मंदिर, कर्रा -पतरातू शिव मंदिर आदि में भक्तों का तांता लगा रहा।
शिवपुर में भक्तों का लगा मेला
शिवपुर में भी भोलेनाथ की पूजा करने इतनी भीड़ उमड़ी कि भक्तों की लंबी पंक्ति लग गई। हजारों भक्तों ने भू-गर्भ 'से निकले शिवलिंग की पूजा की और मन्नतें मांगी। इस मौके पर यहां भव्य मेले का भी आयोजन किया गया है। शिवपुर में आदिकाल से दो शिवलिंग भू-गर्भ से निकले हैं। दोनों के बीच की दूरी 10 मीटर के करीब है। दोनों शिवलिंग के बीच में एक साल का पेड़ है, जिसकी वजह से दोनों शिवलिंग को एक साथ नहीं देखा जा सकता है। कहा जाता है कि एक चरवाहा जंगल में जब मवेशी चरा रहा था, तो उसने शिवलिंग को देखा और इसकी जानकारी गांव के लोगों को हुई।
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